मर्द मराठा Mard Maratha Lyrics - Panipat | Sanjay Dutt

Mard Maratha Lyrics - Panipat | Sanjay Dutt

Singer Ajay - Atul , Sudesh Bhosle, Kunal
Music Ajay Atul
Song Writer Javed Akhtar

यह गीत आशुतोष गोवरिकर की निर्देशन में बनी फिल्म पानीपत का है जिसे गाया है अजय अतुल, सुदेश भोसले और कुणाल ने। अजय अतुल दोनों भाई है और संगीत निर्देशक भी है और इन्होंने ही इस गीत में अपनी संगीत दिया है और इस गीत को लिखा है जावेद अख्तर ने। पानीपत फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास असर नहीं छोड़ पायी और इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा में 100 करोड़ का आंकड़ा भी नहीं छू पाया।

Song Lyrics

 हे, बोले धरती जयकारा, गगन है सारा गूँजा रे
जग में लहराया न्यारा ध्वज है हमारा ऊँचा रे
हम वो योद्धा, वो निडर हम जो भी दिशा में जाएँ
सारे पथ चरण छुए और पर्बत शीश नवाएँ


रास्ते से हट जाएँ, नदिया हो के हवाएँ
हम है जियाले जीतने को हम रण में उतरते हैं
हम सूरज हैं अंत हम ही रातों का करते हैं
युग-युग की ज़ंज़ीरों को हमने ही काटा रे


बोल उठा ये जग सारा "जय मर्द मराठा" रे
जो रक्त है तन में बहता, वो हमसे है ये कहता
"संमान के बदले जान भी दे, तो नही है घाटा रे"
युग-युग की ज़ंज़ीरों को हमने ही काटा रे


बोल उठा ये जग सारा "जय मर्द मराठा" रे
युग-युग की ज़ंज़ीरों को हमने ही काटा रे
बोल उठा ये जग सारा "जय मर्द मराठा" रे
वीरता हमने बोई और ये फल पाया


दूर तक अब है फ़ैली अपनी ही छाया
ओ, जीवन जो रणभूमि में करता है तांडव
आज उसी ने है विजय का नगाड़ा बजाया
अपनी है जो गाथा, अब है समय सुनाता


सब को है ये बताता, कैसे सुख हमने बाँटा रे
युग-युग की ज़ंज़ीरों को हमने ही काटा रे
बोल उठा ये जग सारा "जय मर्द मराठा" रे
युग-युग की ज़ंज़ीरों को हमने ही काटा रे


बोल उठा ये जग सारा "जय मर्द मराठा" रे
सच के सिपाही, अलबेले राही क्या जानते हो तुम?
जब तुम नही थे, हम कब यहीं थे? हम भी थे जैसे ग़ुम
तुम ध्यान में थे, तुम प्राण में थे जैसे जनम-जनम


जब तीर तुमपे बरसे तो जैसे घायल हुए थे हम
ओ, देखो तो मुझसे कह के, मैं जान दे दूँ तुमपे
क्या तुम नहीं ये जानते?
दुविधा के आगे जब नारी जागे, हिम्मत से काम ले
चूड़ी उतारे, कंगन उतारे, तलवार थाम ले


मैंने ली आज शपथ है, वीरों का पथ है मेरा रे
रक्ष अपना जो बना लूँ, वहीं पे डालूँ डेरा रे
हम वो योद्धा, वो निडर हम जो भी दिशा में जाएँ
सारे पथ चरण छुए और पर्बत शीश नवाएँ


रास्ते से हट जाएँ, नदिया हो के हवाएँ
हम है जियाले जीतने को हम रण में उतरते हैं
हम सूरज हैं अंत हम ही रातों का करते हैं
युग-युग की ज़ंज़ीरों को हमने ही काटा रे


बोल उठा ये जग सारा "जय मर्द मराठा" रे
जो रक्त है तन में बहता, वो हमसे है ये कहता
"संमान के बदले जान भी दे, तो नही है घाटा रे"
युग-युग की ज़ंज़ीरों को हमने ही काटा रे


बोल उठा ये जग सारा "जय मर्द मराठा" रे
युग-युग की ज़ंज़ीरों को हमने ही काटा रे
बोल उठा ये जग सारा "जय मर्द मराठा" रे



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